हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले आईना देखते हैं. बालों को ठीक करना हो या बस चेहरा देखना, हमें लगता है इसमें बुरा क्या है? लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को खराब कर सकती है.
चेहरे पर होती है रात भर की सुस्ती
वास्तु कहता है कि जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारे शरीर में आलस और नकारात्मक ऊर्जा भरी होती है. आपने गौर किया होगा कि सुबह चेहरा थोड़ा सूजा हुआ और बुझा-बुझा सा दिखता है. जैसे ही आप आईना देखते हैं, वो नकारात्मक तरंगें आपकी आंखों के जरिए वापस शरीर में चली जाती हैं. नतीजतन पूरा दिन भारीपन और चिड़चिड़ेपन में बीतता है.
खुद को देखने से अच्छा है ईश्वर को याद करना
शास्त्रों में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के आसपास का सबसे पवित्र समय माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले अपने इष्ट देव का स्मरण करना चाहिए या अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए.
हथेलियों के दर्शन का रहस्य
हथेलियों को देखते समय इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है. "कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥" इसका अर्थ है कि हाथ के अग्र भाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (या ब्रह्मा) का वास होता है. जब आप आईना देखते हैं, तो आप इस दैवीय ऊर्जा के बजाय अपनी शारीरिक माया से जुड़ जाते हैं, जिसे अध्यात्म में मोह-माया का प्रतीक माना गया है.
बेड के सामने आईना?
अगर आपके बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल है और आपकी आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी शक्ल दिखती है, तो ये वास्तु के हिसाब से बड़ा दोष है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि सोते समय हमारी आत्मा का एक सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है, और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है. इससे घर में तनाव बढ़ता है.
तो फिर सुबह उठकर क्या करें?
आईने को ढक दें: अगर बेडरूम में आईना है और उसे हटा नहीं सकते, तो रात को सोते समय उस पर एक साफ पर्दा या सफेद कपड़ा डाल दें. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने से रोकता है.
धार्मिक चित्रों के दर्शन: अपने कमरे में ऐसी जगह पर भगवान, उगते हुए सूरज या चहचहाते पक्षियों की तस्वीर लगाएं जहाँ सुबह सबसे पहले आपकी नजर पड़े. शास्त्रों में इसे मंगल दर्शन कहा गया है.
हथेलियां चूमकर दिन शुरू करें: बिस्तर छोड़ने से पहले अपनी हथेलियों को देखें, उन्हें अपने चेहरे पर फेरें. इससे हाथों की सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर में प्रवाहित होती है.
चेहरा धोने के बाद ही देखें आईना: जब आप फ्रेश हो जाएं, नहा लें या कम से कम ठंडे पानी से आंखें धो लें, तब आईना देखना सुरक्षित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जल से शुद्ध होने के बाद शरीर का आभामंडल (Aura) स्वच्छ हो जाता है.







