सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट
युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल
योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को
प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।






