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फर्जी एफडी से ग्रामीण बैंक में बड़ा घोटाला, कोर्ट ने आर्थिक अपराध को बताया गंभीर

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 पटना

 पटना हाईकोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में आरोपी धर्मेंद्र कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की।

इस दौरान इसे व्यापक जनहित का विषय मानते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं।

ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अधिक सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। करीब ₹1.89 करोड़ के गबन से जुड़े इस मामले को अदालत ने गंभीर मानते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई।

फर्जी एफडी के जरिए करोड़ों की हेराफेरी
मामला उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के पूर्व कर्मी धर्मेंद्र कुमार सिंह से जुड़ा है, जिस पर 2013 से 2024 के बीच ग्रामीण ग्राहकों को फर्जी एफडी प्रमाणपत्र जारी कर सुनियोजित तरीके से धन की हेराफेरी करने का आरोप है।

जांच में खुलासा हुआ कि कई मामलों में ग्राहकों की पासबुक में प्रविष्टि तो की गई, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में खाते खोले ही नहीं गए।

एक मामले में ₹15 लाख जमा करने वाले ग्राहक की राशि बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं पाई गई।

अदालत ने टिप्पणी की कि यह धोखाधड़ी इतनी संगठित और तकनीकी रूप से जटिल थी कि करीब एक दशक तक इसका खुलासा नहीं हो सका।

पैसे निकालने का प्रयास करते समय सामने आया मामला
जब ग्राहकों ने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया, तब जाकर मामला सामने आया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्हाइट कॉलर क्राइम न केवल सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं।

ये देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि 2014 की स्टाफ अकाउंटेबिलिटी पॉलिसी में निर्धारित समय-सीमा का लाभ धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्यों में नहीं दिया जा सकता।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति भारतीय रिजर्व बैंक, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है तथा कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की है।

 

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