Home राज्य पर्यावरण से कमाई तक: दिल्ली सरकार का नया कार्बन क्रेडिट प्लान, कैसे...

पर्यावरण से कमाई तक: दिल्ली सरकार का नया कार्बन क्रेडिट प्लान, कैसे होगी बंपर आमदनी?

78
0

नई दिल्ली
दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दिल्ली की हरित परियोजनाओं से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को मापकर कार्बन क्रेडिट में बदला जाएगा और इन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के लिए बिना सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले नया राजस्व स्रोत बनेगा।
 
दिल्ली अब हरित प्रयासों से कमाएगी राजस्व
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस फ्रेमवर्क से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिससे विकास कार्य तेज होंगे। यह पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा और राजस्व को राज्य के कंसॉलिडेटेड फंड में जमा कर सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाया जाएगा। दिल्ली कार्बन बाजार में अग्रणी राज्य बनेगी।'

पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली पहले से ही बड़े पैमाने पर हरित बदलाव ला रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसें, शहरी वानिकी, यमुना की सफाई, सोलर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और लैंडफिल से बायोगैस उत्पादन शामिल हैं। इन प्रयासों से होने वाली उत्सर्जन कटौती को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा।

कैसे काम करेगा फ्रेमवर्क?
एक मीट्रिक टन CO₂ (या समकक्ष ग्रीनहाउस गैस) कम होने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलेगा। क्रेडिट को वीरा, गोल्ड सेटेंडर्ड या भारत के उभरते कार्बन मार्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर किया जाएगा। इन्हें बेचकर मिलने वाली कमाई सीधे राज्य के फंड में जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया राजस्व-साझेदारी मॉडल पर आधारित है। सरकार को कोई शुरुआती खर्च नहीं करना पड़ेगा। विशेष एजेंसियां सफलता के बाद ही फीस लेंगी। पर्यावरण विभाग तीन विशेषज्ञ एजेंसियों को पैनल में शामिल करेगा, जो प्रोजेक्ट की पहचान, दस्तावेजीकरण, सत्यापन, क्रेडिट जारी करना और ट्रेडिंग में मदद करेंगी। मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (MRV) सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा।

अन्य राज्यों से प्रेरणा
दिल्ली ने सफल मॉडलों से सीख ली है। इंदौर ने कंपोस्टिंग और सोलर प्रोजेक्ट्स से 50 लाख रुपये कमाए। मेघालय में किसानों को प्रति टन 40 यूरो मिले, जबकि अरुणाचल प्रदेश के छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट से 16,000 से ज्यादा टन क्रेडिट बने। दिल्ली अब इनसे आगे बढ़कर शहरी स्तर पर मिसाल कायम करेगी।

दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन बंद
कैबिनेट ने दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (DFC) को बंद करने का भी फैसला लिया। यह संस्था लगातार घाटे में चल रही थी। इसकी नेट वर्थ माइनस 15.45 करोड़ रुपये हो गई और बैड लोन 55.8% तक पहुंच गए। रिकवरी की कोई संभावना नहीं बची थी। अब इन संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here