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अपराध स्थल से न्यायालय तक—वैज्ञानिक साक्ष्य, पुलिस जांच और अभियोजन की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन

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भोपाल 

नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों और अपराध की सूचना से लेकर न्यायालय के अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को आमजन के लिए सरल, रोचक और व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं फॉरेंसिक जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं का सजीव नाट्य मंचन किया गया। प्रदर्शनी में यह दिखाया गया कि किसी अपराध के बाद पुलिस द्वारा घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने से लेकर फॉरेंसिक प्रयोगशाला में परीक्षण, रिपोर्ट तैयार करने और आगे की कानूनी कार्रवाई तक विभिन्न विशेषज्ञ एवं इकाइयां किस प्रकार समन्वय के साथ कार्य करती हैं।

प्रदर्शनी में फॉरेंसिक जांच की पूरी प्रक्रिया को अपराध स्थल से प्रयोगशाला तक चरणबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया। मध्यप्रदेश में विकसित फॉरेंसिक जांच व्यवस्था के अंतर्गत सभी जिलों में उपलब्ध Mobile Forensic Units की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्यों का collection, documentation, photography एवं videography किस प्रकार करते हैं, इसे सजीव प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया।

प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि BNS की धारा 176(3) के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित गंभीर अपराधों में crime scene examination तथा photography/videography का विशेष महत्व है। अपराध स्थल पर उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करना और उनका दस्तावेजीकरण आगे की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत आधार प्रदान करता है।

सजीव मंचन में फॉरेंसिक जांच के विभिन्न चरणों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि आमजन आसानी से समझ सकें कि—

        · Crime Scene पर Mobile Forensic Unit/Forensic Expert वैज्ञानिक साक्ष्यों का documentation और collection करता है।

        · Hospital में Post-Mortem Forensic Medicine Expert द्वारा किया जाता है, जिसमें मृत्यु के कारण, प्रकृति तथा अन्य medico-legal aspects का परीक्षण किया जाता है।

        · FSL Laboratory में Scientific Officer/Forensic Scientist द्वारा जब्त exhibits का वैज्ञानिक परीक्षण कर examination report तैयार की जाती है।

DNA से Voice Analysis तक—प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षणों का प्रदर्शन

प्रदर्शनी में फॉरेंसिक विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में होने वाली वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रियाओं को भी व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया। इसमें DNA, Biology, Chemistry, Toxicology, Ballistics, Physics तथा Voice Analysis से संबंधित परीक्षणों को सरल एवं समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत किया गया।

आगंतुकों को यह दिखाया गया कि अपराध स्थल से प्राप्त साक्ष्य किस प्रकार प्रयोगशाला तक पहुंचते हैं, विभिन्न शाखाओं के विशेषज्ञ उनका वैज्ञानिक विश्लेषण किस प्रकार करते हैं और परीक्षण के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने के बाद रिपोर्ट किस प्रकार तैयार की जाती है।

प्रदर्शनी में e-Forensic 2.0 प्रणाली के माध्यम से फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने, उसके डिजिटल संधारण तथा पुलिस एवं माननीय न्यायालय को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी सजीव नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया।

इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिक पुलिसिंग में वैज्ञानिक साक्ष्य केवल जांच को दिशा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘मुस्कान अभियान’ और महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित

प्रदर्शनी में ‘मुस्कान अभियान’ के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील एवं समन्वित कार्यप्रणाली की जानकारी प्रदर्शित की गई है। इसमें बालक-बालिकाओं के गुम होने की सूचना मिलने पर थाना पुलिस, जिला पुलिस, साइबर सेल, जीआरपी तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों द्वारा किए जाने वाले समन्वित प्रयासों को दर्शाया गया है। तकनीकी विश्लेषण, CCTV फुटेज, अंतर्राज्यीय समन्वय तथा अन्य माध्यमों से गुमशुदा बच्चों की तलाश और उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है।

प्रदर्शनी में बाल सुरक्षा से जुड़े गुड टच-बैड टच, POCSO Act, साइबर सुरक्षा, बाल अधिकार, बाल विवाह, लैंगिक समानता एवं सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसे विषयों पर पुलिस द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है।

महिला हेल्प डेस्क की भूमिका और थानों में महिलाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सहज एवं संवेदनशील प्रथम संपर्क बिंदु की जानकारी भी दी जा रही है। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से महिलाओं को पुलिस प्रक्रिया, उनके विधिक अधिकारों तथा आवश्यक सहायता के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

विद्यार्थियों और युवा आगंतुकों में भी दिखा उत्साह, पुलिस प्रदर्शनी बनी सीखने का अनुभव

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों एवं युवा आगंतुकों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है। एक्सीलेंस कॉलेज, भोपाल के फोरेंसिक विषय के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा FSL अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड़ द्वारा उन्हें फोरेंसिक विज्ञान एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के क्विज जोन में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और डायल-112 की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया।

कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थियों ने पुलिस बैंड दल की आकर्षक एवं मनमोहक संगीतमयी प्रस्तुति का आनंद लिया। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में प्रस्तुत अभियोजन एवं न्यायालय से जुड़ी गतिविधियों का अवलोकन कर न्यायिक प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अनुभव प्राप्त किया।

प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद युवा विद्यार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए और पुलिस की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक, फोरेंसिक अनुसंधान तथा नागरिक सुरक्षा से जुड़ी प्रस्तुतियों को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

 

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