नई दिल्ली
शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में विलय की मंजूरी के बाद पार्टी ने इसे असंवैधानिक बताया है। शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा स्पीकर के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है, लेकिन विधायकों या सांसदों का कोई समूह अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) के बागी सांसद एक अलग गुट बना सकते थे। दानवे ने कहा, 'यह मंजूरी गैर-कानूनी है। हम इस फैसले को चुनौती देंगे।' पूर्व सांसद और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्य संजय निरुपम ने कहा कि विलय से दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, 'सभी छह सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से) अलग होने का फैसला किया। इसी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को मंजूरी दी है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।' बता दें कि इन छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है।
टीएमसी के बागियों को भी मंजूरी
सूत्रों ने बताया कि तृणमूल के 20 बागी सांसद सदन में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठेंगे। इन बागी सांसदों की इस मांग पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है कि उन्हें एनसीपीआई के सांसदों के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए। तृणमूल और शिवसेना (उबाठा) ने बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। सूत्रों के मुताबिक, संसद के कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया गया तथा उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को अंतिम निर्णय लेने में मदद के लिए अपने सुझाव दिए। ये निर्णय संसद के मानसून सत्र से दो दिन पहले लिए गए, जो 20 जुलाई से शुरू होगा।
क्या है राज्यसभा का गणित
राज्यसभा में इस समय कुल प्रभावी सदस्यों की संख्या 242 है । इनमें से 141 सांसद एनडीए के पास हैं। मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों की मदद से एनडीए का समर्थन 151 तक पहुंच रहा है। हाल के राजनीतिक उलटफेर के बाद लोकसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास 348 का आंकड़ा हो सकता है। यह दो तिहाई बहुमत से 12 सीट कम है।






