पटना
बिहार ने बाढ़ से दस हजार करोड़ नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया है। पानी उतरने के बाद फसल, सड़क और अन्य संरचना में हुई क्षति का सही आकलन होगा। इसलिए 15 अक्तूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी। ऐसे में इस राशि के और बढ़ने की संभावना है। उसके बाद ही केंद्र सरकार के समक्ष ज्ञापन रखा जाएगा। बुधवार को बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट बताई। जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन आदि विभागों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए केंद्रीय मंत्री के समक्ष बिहार में हुए नुकसान को विस्तार से बताया।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य आदि विभागों की ओर से क्षति की रिपोर्ट पानी उतरने के बाद तैयार होगी। अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने पानी कम होने पर अंतर मंत्रालयी टीम बिहार भेजने की बात कही। इससे पहले बिहार सरकार की ओर से केंद्र को एक ज्ञापन भेजा जाएगा, जिसमें बिहार में हुए नुकसान की पूरी विवरणी भेजी जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में टीम भेजी जाएगी जो स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेगी। लोक सेवक आवास में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी एवं बिजेंद्र यादव, मंत्री विजय सिन्हा, रत्नेश सादा, सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार आदि थे।
प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं बिहार आया : शिवराज
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए सम्राट चौधरी की सरकार को केंद्र से पूरा सहयोग मिलेगा। संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र खड़ा है। शिवराज ने वैशाली के राघोपुर के समीप पत्रकारों से कहा कि संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार खड़ी है। बाढ़ से महाविनाश को देखते हुए प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं आया हूं। कृषि मंत्री ने मुंगेर में नौवागढ़ी के उच्च विद्यालय सीताकुंड और भागलपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में संचालित बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे लोगों और बच्चों से संवाद भी किया।
जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि भागलपुर के राघोपुर में मार्जिनल बांध का नए सिरे से निर्माण होगा। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज के समीप बिहार प्रक्षेत्र में बांध कमजोर है। इसके टूटने का खतरा है। इसकी मरम्मत की आवश्यकता है। इस बार पुनपुन नदी में अधिक पानी आने के कारण कई स्थानों पर छोटे-छोटे बांध टूट गए तो कई स्थानों पर बांध के ऊपर से पानी बहने लगा। विभाग ने तय किया है कि अगले साल मानसून के पहले पुनपुन बांध सहित राज्य के जिस किसी स्थान पर बांध के ऊपर से पानी प्रवाहित हुआ है, वहां उसकी ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। आबादी के समीप से गुजरने वाले अन्य बांधों की भी विशेष मरम्मत की जाएगी।
डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट
कृषि विभाग ने लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की रिपोर्ट दी है। सबसे अधिक धान-मक्का के साथ ही सब्जी व केले की खेती को नुकसान पहुंचा है। पानी उतरने पर आकलन के बाद इनपुट अनुदान आवेदन मांगा जाएगा। इसके आधार पर असिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर 8500 रुपए प्रति हेक्टेयर तो सिंचित क्षेत्र में 17 हजार इनपुट अनुदान मिलता है। बहुवर्षीय फसल गन्ना के लिए 22500 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए सहायता दी जाती है। इधर विभाग की तैयारी है कि प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक फसल के रूप में मटर, सरसों सहित अन्य फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
दुर्गापूजा के पूर्व नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजेंगे: सम्राट
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रथमदृष्टया केंद्रीय मंत्री एवं उनकी टीम ने जो स्थिति देखी, उससे प्रधानमंत्री जी को भी अवगत करायेंगे। दुर्गा पूजा से पहले नुकसान का पूरा आकलन कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र की ओर से बिहार को हमेशा सहयोग मिलता रहा है और इस बार भी अधिकतम सहायता की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का विस्तृत एवं सटीक आकलन पूरा होने के बाद किसानों एवं अन्य प्रभावितों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य टीमें भी बिहार आकर नुकसान की पूरी समीक्षा करेगी। बाढ़ से बिहार हर साल प्रभावित रहता है, इसके स्थायी समाधान के लिये काम करना है।






