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	<title>छत्तीसगढ़ &#8211; Kakkajee.com</title>
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		<title>25 करोड़ बच्चों के सपनों को भारत  हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प</title>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 18:35:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify">प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित &lsquo;सेवा संकल्प अभियान&rsquo; की दूसरी पहल &lsquo;25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत&rsquo; इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे।</p>
<p style="text-align:justify">विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम श्री स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify">लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify">इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify">छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify">वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखेगा। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करने की शक्ति देगी।</p>
<p style="text-align:justify">आज का विद्यार्थी कल का केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं, बल्कि नया विचार देने वाला शोधकर्ता, नई तकनीक बनाने वाला नवाचारी, अपना व्यवसाय खड़ा करने वाला उद्यमी और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाला परिवर्तनकारी नागरिक बन सकता है। यही वह सोच है जो विकसित भारत के संकल्प को व्यापक अर्थ देती है।</p>
<p style="text-align:justify">&lsquo;25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत&rsquo; इसलिए केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं करता, यह पूरे देश के भविष्य की बात करता है। आज किसी स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, किसी एकलव्य विद्यालय में पढ़ता जनजातीय विद्यार्थी, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा और अपने गांव में भविष्य का कोई नया रास्ता तलाशता विद्यार्थी-ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे।</p>
<p style="text-align:justify">इन बच्चों के सपनों को अवसर देना ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। क्योंकि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, उसकी नई पीढ़ी की कल्पनाशक्ति और सामर्थ्य में होती है। जब करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, उनके भीतर सवाल पूछने की हिम्मत होगी, प्रयोग करने की स्वतंत्रता होगी और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी।</p>
<p style="text-align:justify">वर्ष 2047 का विकसित भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है। उसकी नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है, उसकी उम्मीदें बच्चों की आंखों में पल रही हैं और उसकी दिशा युवाओं के सपनों से तय होगी। इसलिए जरूरी है कि देश का कोई बच्चा अवसर के अभाव में अपने सपने को छोटा न करे। उसके सपनों की उड़ान जितनी ऊंची हो, भारत का आकाश उतना ही खुला हो।</p>
<p style="text-align:justify">क्योंकि 25 करोड़ बच्चों के सपने केवल 25 करोड़ व्यक्तिगत सपने नहीं हैं। ये 25 करोड़ संभावनाएं हैं, 25 करोड़ नई दिशाएं हैं और 25 करोड़ ऐसे भविष्य हैं, जिनसे मिलकर भारत का नया अध्याय लिखा जाएगा। जब इन सपनों को शिक्षा, अवसर, कौशल और सही दिशा का सहारा मिलेगा, तब वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल एक लक्ष्य नहीं रहेगा, बल्कि करोड़ों बच्चों की आंखों में दिखाई देने वाला साकार सपना होगा। यही &lsquo;सेवा संकल्प अभियान&rsquo; बच्चों के सपनांे के भारत का वास्तविक भाव है।</p>
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		<title>सेवा सेतु के जरिए घर के पास ही राशन कार्ड में जुड़ा बच्चे का नाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 18:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर मुख्यमंत्री&#160; विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप शासकीय सेवाओं को आम नागरिकों के घर के नजदीक, सरल, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में सेवा सेतु पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में कोंडागांव जिले में डिजिटल माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप शासकीय सेवाओं को आम नागरिकों के घर के नजदीक, सरल, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में सेवा सेतु पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में कोंडागांव जिले में डिजिटल माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है। ग्राम पंचायत सिंगनपुर निवासी&nbsp; उमेश कुमार नाग का राशन कार्ड में नाम जुड़वाना सेवा सेतु से आसान हुआ।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;नाग ने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अपने राशन कार्ड में बच्चे का नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र मुलमुला के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई और उनका कार्य बहुत ही कम समय में सफलतापूर्वक पूरा हो गया। पहले ऐसे कार्यों के लिए नागरिकों को संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने और अलग से समय निकालना पड़ता था। अब सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने से अब नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक ही आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है। हितग्राही&nbsp; नाग ने इस त्वरित एवं जनहितकारी सेवा के लिए मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा सेतु के माध्यम से उपलब्ध हो रही ऐसी सुविधाएं मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय के उस संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसमें शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाकर उन्हें सरल और सहज गांव और आसपास के क्षेत्र में ही आवश्यक सेवाओं का लाभ मिल रहा है।</p>
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		<title>रटगा की सोनू देवी अपने हुनर से परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं भूमिका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 18:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा की मती सोनू देवी के हाथों में हुनर पहले से था, जरूरत थी तो बस उस हुनर को आगे बढ़ाने के लिए थोड़े से आर्थिक संबल की। घर पर ही सिलाई का काम करने वाली सोनू देवी परिवार और आसपास के लोगों के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा की मती सोनू देवी के हाथों में हुनर पहले से था, जरूरत थी तो बस उस हुनर को आगे बढ़ाने के लिए थोड़े से आर्थिक संबल की। घर पर ही सिलाई का काम करने वाली सोनू देवी परिवार और आसपास के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आमदनी में सहयोग करती थीं। मेहनत और हुनर के बावजूद सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण उनके काम का दायरा छोटा था और वह अपनी सिलाई कला को बड़े स्तर पर नहीं ले जा पा रही थीं।</p>
<p style="text-align:justify">सोनू देवी के लिए सिलाई केवल एक काम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जरूरतों में हाथ बंटाने और अपने पैरों पर खड़े होने का माध्यम रही है। वह उपलब्ध संसाधनों में ही लगातार मेहनत करती रहीं। इसी बीच महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए बदलाव की शुरुआत बनी।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>महतारी वंदन योजना बना आर्थिक संबल</strong></p>
<p style="text-align:justify">महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक आर्थिक सहायता ने सोनू देवी को अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने योजना से मिलने वाली राशि और अपनी टेलरिंग मशीन का बेहतर उपयोग करते हुए सिलाई के काम को और गति दी। धीरे-धीरे उनके काम का दायरा बढ़ने लगा और घर से संचालित होने वाला उनका सिलाई कार्य आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित होने लगा।</p>
<p style="text-align:justify">सोनू देवी बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने काम को जारी रखने और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहारा दिया। इससे उन्हें अपने सिलाई कार्य पर ध्यान केंद्रित करने और अपने हुनर को और बेहतर तरीके से उपयोग करने का अवसर मिला।</p>
<p style="text-align:justify">महतारी वंदन योजना के अंतर्गत सोनू देवी के बैंक खाते में 31वीं किस्त की राशि भी पहुंच चुकी है। योजना के माध्यम से लगातार मिल रही आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित संबल का काम कर रही है। इस सहयोग से उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>सिलाई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम</strong></p>
<p style="text-align:justify">आज सोनू देवी के लिए सिलाई का काम महज घर तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है। उनका हुनर अब आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ता माध्यम बन रहा है। अपनी मेहनत, लगन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए वह अपने काम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने हुनर पर आगे काम करने और जरूरत के अनुसार संसाधनों का उपयोग करने का अवसर दिया है। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग मिलने के साथ ही उनके आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार</strong></p>
<p style="text-align:justify">मती सोनू देवी महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उनके सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उनका कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने काम को जारी रखने का संबल मिला है और अब वह अपने हुनर के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">सोनू देवी की कहानी यह दर्शाती है कि नियमित आर्थिक सहयोग जब मेहनत और हुनर के साथ जुड़ता है, तो छोटे स्तर पर किया जा रहा काम भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। महतारी वंदन योजना उनके लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ अपने हुनर को नई पहचान देने का माध्यम बन रही है।</p>
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		<title>गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 18:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;प्रधानमंत्री&#160; नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;प्रधानमंत्री&nbsp; नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी</strong></p>
<p style="text-align:justify">मती सुमन लता वाकरे आज &lsquo;लखपति दीदी&rsquo; के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह</strong></p>
<p style="text-align:justify">समूह के माध्यम से मती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया।</p>
<p style="text-align:justify">व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>&lsquo;लखपति दीदी&rsquo; बनकर बनीं गांव की प्रेरणा</strong></p>
<p style="text-align:justify">मती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।</p>
<p style="text-align:justify">किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने &lsquo;लखपति दीदी&rsquo; बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल</strong></p>
<p style="text-align:justify">मती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify">प्रधानमंत्री&nbsp; नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>सेवा संकल्प अभियान में सुमन लता की कहानी बनी प्रेरणा</strong></p>
<p style="text-align:justify">सेवा संकल्प अभियान के परिप्रेक्ष्य में सुमन लता वाकरे की सफलता की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। यह कहानी बताती है कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब लाभार्थी उन्हें अवसर में बदलकर अपनी मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify">गुदुमदेवरी की सुमन लता आज केवल अपने परिवार के लिए आय का मजबूत आधार नहीं बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि संगठित प्रयास, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।</p>
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		<title>राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला आर्थिक सहयोग, परिवार की आय बढ़ाने में बनी सहभागी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:50:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;जब अवसर और सहयोग साथ मिले तो मेहनत को नई दिशा मिलती है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की मती रजनी केरकेट्टा की कहानी इसकी मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीमित भूमिका निभाने वाली रजनी ने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया और धीरे-धीरे अपने परिवार की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;जब अवसर और सहयोग साथ मिले तो मेहनत को नई दिशा मिलती है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की मती रजनी केरकेट्टा की कहानी इसकी मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीमित भूमिका निभाने वाली रजनी ने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया और धीरे-धीरे अपने परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन गईं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्व-सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ वह आत्मविश्वास भी दिया, जिसके सहारे वे अब अपनी आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय स्वयं ले रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद खुला नया रास्ता</p>
<p style="text-align:justify">रजनी जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विभिन्न सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी मिली और मुर्गी पालन को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।</p>
<p style="text-align:justify">उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपये, बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये तथा स्वयं सिद्धा के तहत प्रथम वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। आजीविका गतिविधि को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए द्वितीय वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि का पुनः नवीनीकरण भी किया गया।</p>
<p style="text-align:justify">इस आर्थिक सहयोग से रजनी ने मुर्गी पालन गतिविधि को विस्तार दिया। समूह से मिलने वाले मार्गदर्शन ने उन्हें व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने और आय के अवसरों को बढ़ाने का भरोसा दिया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>आर्थिक सहयोग के साथ बढ़ा आत्मविश्वास</strong></p>
<p style="text-align:justify">रजनी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी मिला। मुर्गी पालन से जुड़कर वे अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ सकीं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">अब आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय लेने में उनकी सक्रिय भूमिका है। अपनी मेहनत और समूह के सहयोग से उन्होंने यह विश्वास हासिल किया है कि ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर और प्रयासों के बल पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>गांव की महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह बन रहे बदलाव का माध्यम</strong></p>
<p style="text-align:justify">राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। समूहों के माध्यम से नियमित बचत, बैंक लिंकेज और विभिन्न निधियों से आजीविका गतिविधियों के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify">इससे ग्रामीण महिलाएं मुर्गी पालन, पशुपालन, कृषि और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन रही हैं। साथ ही आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ने से निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>&ldquo;समूह से मिला सहारा, अपने पैरों पर खड़े होने का मिला अवसर&rdquo;</strong></p>
<p style="text-align:justify">मती रजनी केरकेट्टा ने प्रधानमंत्री&nbsp; नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री&nbsp; विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी आजीविका आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि मुर्गी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का रास्ता दिया है।</p>
<p style="text-align:justify">रजनी की यह कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, पूंजी और मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो वे केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने वाली नहीं, बल्कि अपने आर्थिक निर्णय स्वयं लेने वाली आत्मनिर्भर उद्यमी भी बन सकती हैं।</p>
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		<title>सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जामपाली में खुली &#8216;बदलाव की राह&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:40:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[​रायपुर कभी अवैध कब्जे की आड़ में उपेक्षित पड़ी शासकीय जमीन आज गांव के मासूमों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत सरिया तहसील के ग्राम जामपाली ने प्रशासनिक मुस्तैदी और जनहितैषी दृष्टि का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है, जहां अतिक्रमण से मुक्त कराई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>​रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">कभी अवैध कब्जे की आड़ में उपेक्षित पड़ी शासकीय जमीन आज गांव के मासूमों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत सरिया तहसील के ग्राम जामपाली ने प्रशासनिक मुस्तैदी और जनहितैषी दृष्टि का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है, जहां अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन पर अब बच्चों की किलकारियां और शिक्षा के स्वर गूंज रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​अवैध कब्जे की जकड़न से जनहित का सफर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​ग्राम जामपाली स्थित शासकीय भूमि (खसरा नंबर 309/1, कुल रकबा 1.833 हेक्टेयर) के एक हिस्से पर लंबे समय से स्थानीय लोगों का अवैध कब्जा था। इसके चलते गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए आवश्यक प्राथमिक सुविधाओं और बाल विकास केंद्र के निर्माण में बाधा आ रही थी।<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए &#039;सेवा संकल्प अभियान&#039; के तहत तहसीलदार सरिया द्वारा राजस्व अभिलेखों के सूक्ष्म परीक्षण व कड़े स्थल निरीक्षण के बाद नियमानुसार बेदखली की सख्त कार्रवाई की गई। राजस्व टीम की इस त्वरित प्रशासनिक पहल से करोड़ों मूल्य की शासकीय भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र: बाल विकास की नई मिसाल</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​जमीन को केवल खाली कराने तक सीमित न रखते हुए, जिला व जनपद पंचायत बरमकेला के समन्वय से वहां एक &#039;आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र&#039; का भव्य निर्माण कराया गया। अब गांव के छोटे बच्चों को एक ही छत के नीचे सुरक्षित, हाइजीनिक और खेल-खेल में सीखने योग्य परिवेश मिल रहा है। केंद्र के माध्यम से बच्चों को सही पोषण, स्वास्थ्य जांच और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।अतिक्रमण हटने से न केवल गांव की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित हुई, बल्कि शासन के प्रति ग्रामीणों का विश्वास भी और मजबूत हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​बदलाव की स्थायी छाप</strong></p>
<p style="text-align:justify">कब्जामुक्त हुई यह जमीन आज जामपाली के बच्चों के सुनहरे कल को आकार दे रही है। यह पहल सिद्ध करती है कि यदि प्रशासनिक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ जनहित को प्राथमिकता दी जाए, तो उपेक्षित पड़ी शासकीय संपत्तियां भी समाज और नई पीढ़ी के उत्थान का सबसे मजबूत आधार बन सकती हैं।</p>
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		<title>अतिक्रमण मुक्त 25 एकड़ बंजर भूमि पर उगी समृद्धि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;​सारंगढ़&#8211;बिलाईगढ़ जिले के तहसील सरिया स्थित ग्राम सुखापाली में बदलाव की एक अनूठी और प्रेरणादायक कहानी आकार ले रही है। जिस 25 एकड़ शासकीय भूमि पर वर्षों से भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों का कब्जा था, आज वही भूमि महिलाओं के श्रम, दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं के बेहतर अभिसरण (Convergence) से हरी-भरी होकर आर्थिक समृद्धि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​सारंगढ़&ndash;बिलाईगढ़ जिले के तहसील सरिया स्थित ग्राम सुखापाली में बदलाव की एक अनूठी और प्रेरणादायक कहानी आकार ले रही है। जिस 25 एकड़ शासकीय भूमि पर वर्षों से भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों का कब्जा था, आज वही भूमि महिलाओं के श्रम, दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं के बेहतर अभिसरण (Convergence) से हरी-भरी होकर आर्थिक समृद्धि का केंद्र बन चुकी है। &#039;हरियाली स्व-सहायता समूह&#039; की 14 महिलाएं इस भूमि के जरिए न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के &#039;लखपति दीदी&#039; अभियान की नई पहचान बनकर उभर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​कब्जे से मुक्ति: अतिक्रमण से आजीविका तक का सफर</strong></p>
<p style="text-align:justify">ग्राम सुखापाली की करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में थी। राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से इस भूमि को सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया। प्रशासन ने भूमि को केवल अपने आधिपत्य में लेने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का जरिया बनाने की दूरदर्शी योजना तैयार की।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​योजनाओं का अभिसरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​बंजर और असिंचित भूमि को मॉडल फार्म में बदलने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया। वीबीग्रामजी (VB-GramG) योजना के तहत जमीन को कृषि योग्य बनाकर आवश्यक शेड का निर्माण कराया गया। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से पूरे 25 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चैन-लिंकिंग फेंसिंग कराई गई और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई। क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से समूह को 10 लाख रुपये की ऋण सहायता दी गई।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​7,300 अमरूद के पौधे और अंतर-फसली मॉडल</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​प्राप्त वित्तीय सहायता से समूह ने उच्च गुणवत्ता वाले वीएनआर (VNR) और पिंक ताइवान किस्म के करीब 7,300 अमरूद के पौधों का रोपण किया। चूंकि अमरूद के बाग से फल आने में समय लगता है, इसलिए महिलाओं की दैनिक आय बनी रहे, इसके लिए स्मार्ट अंतर-फसली (Inter-Cropping) मॉडल अपनाया गया।<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; ​<br />
महिलाओं ने अमरूद के पौधों के बीच खाली पड़ी जमीन पर खीरा, लौकी और मखना जैसी सब्जियों व नकदी फसलों की खेती शुरू की। स्थानीय मंडियों और बाजारों में इन फसलों की बिक्री से समूह को तत्काल और नियमित आय प्राप्त होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>​महिला सशक्तिकरण और &#039;लखपति दीदी&#039; का सपना</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;​कब्जे से मुक्त हुई शासकीय भूमि पर आज खेती, बागवानी और आधुनिक सिंचाई का जो संगम दिख रहा है, उसने सुखापाली गांव के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। &#039;हरियाली स्व-सहायता समूह&#039; की 14 महिलाएं अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक कृषि उद्यमी के रूप में स्थापित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify">​शासकीय भूमि के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह अभिनव प्रयोग पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है, जो यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति और सही नीति से बंजर व अतिक्रमित भूमि को भी &#039;समृद्धि का आधार&#039; बनाया जा सकता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>धमतरी के 97 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों में उकेरी ‘मेरे सपनों के भारत’ की स्वर्णिम तस्वीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:25:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विकासखंड स्तर पर आयोजित दो दिवसीय &#8216;मेरे सपनों का भारत&#8217; विषयक चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में स्कूली विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। 1,483 विद्यालयों के लगभग 97,754 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक कला और ओजस्वी विचारों के माध्यम से एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, हरित और तकनीकी रूप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विकासखंड स्तर पर आयोजित दो दिवसीय &lsquo;मेरे सपनों का भारत&rsquo; विषयक चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में स्कूली विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। 1,483 विद्यालयों के लगभग 97,754 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक कला और ओजस्वी विचारों के माध्यम से एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, हरित और तकनीकी रूप से सक्षम भारत का खाका प्रस्तुत किया।<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;<br />
​प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा। अभियान की मूल भावना &#039;सेवा, सहभागिता और सर्वांगीण विकास&#039; को केंद्र में रखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने जिले में जनभागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।</p>
<p style="text-align:justify">​60 हजार से अधिक बच्चों ने चित्रों से दिए सामाजिक संदेश<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp;​<br />
चित्रकला प्रतियोगिता में 1,483 विद्यालयों के 60,608 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कैनवास और कागजों पर रंगों के जरिए बच्चों ने केवल कला का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा, हरित व स्वच्छ पर्यावरण, डिजिटल तकनीक, उन्नत कृषि, महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की अपनी परिकल्पना को जीवंत कर दिया। चित्रों में औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संतुलन दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify">​ओजस्वी भाषणों में झलकी राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता<br />
&nbsp; &nbsp; ​<br />
इसी क्रम में भाषण प्रतियोगिता में 37,146 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने विचारों को तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, नागरिक कर्तव्यों, विज्ञान व तकनीक के उपयोग और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों का मानना था कि देश का स्वर्णिम भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सक्रिय योगदान और संकल्पों से निर्मित होता है।<br />
&nbsp; &nbsp;<br />
​भविष्य की नींव और सशक्त भावी पीढ़ी<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp; ​<br />
सेवा संकल्प अभियान से विद्यार्थियों का यह जुड़ाव आने वाले समय के सशक्त भारत की दिशा तय करता है। धमतरी जिले के हजारों बच्चों की यह सक्रिय भागीदारी यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत का उज्ज्वल भविष्य बड़े सपनों के साथ-साथ उन्हें पूरा करने के लिए आज लिए गए छोटे-छोटे संकल्पों से साकार होगा</p>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत जलाशय परिसर में हुआ श्रमदान और वृक्षारोपण</title>
		<link>https://www.kakkajee.com/voluntary-labor-and-tree-plantation-drives-were-conducted-at-the-reservoir-premises-under-the-seva-mera-yogdan-service-my-contribution-initiative/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160;सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत &#8216;सेवा मेरा योगदान&#8217; पहल जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत कर रही है। इसी क्रम में जल संसाधन संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर द्वारा विकासखण्ड बतौली के ग्राम घोघरा स्थित घोघरा जलाशय योजना में जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित जनभागीदारी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong></p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत &lsquo;सेवा मेरा योगदान&rsquo; पहल जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत कर रही है। इसी क्रम में जल संसाधन संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर द्वारा विकासखण्ड बतौली के ग्राम घोघरा स्थित घोघरा जलाशय योजना में जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए श्रमदान और वृक्षारोपण किया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>सामूहिक श्रमदान से स्वच्छ हुआ जलाशय परिसर</strong></p>
<p style="text-align:justify">घोघरा जलाशय परिसर में आयोजित अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों और विभागीय कर्मचारियों ने एक साथ श्रमदान कर बांध एवं जलाशय परिसर की साफ-सफाई की। सामूहिक प्रयास से परिसर में फैले कचरे और अनुपयोगी सामग्री को हटाया गया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>पौधरोपण के साथ संरक्षण का भी लिया संकल्प</strong></p>
<p style="text-align:justify">कार्यक्रम के दौरान जलाशय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और विभागीय कर्मचारियों ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। जल स्रोतों के आसपास हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>जल संरक्षण और स्वच्छता की सामूहिक शपथ</strong></p>
<p style="text-align:justify">कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता की सामूहिक शपथ ली। सभी ने जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा समाज के अन्य लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।</p>
<p style="text-align:justify">&lsquo;सेवा मेरा योगदान&rsquo; पहल के तहत आयोजित यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान के मूल उद्देश्य&mdash;जनभागीदारी के माध्यम से समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को मजबूत करने&mdash;का प्रभावी उदाहरण बना। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अमले की सहभागिता ने स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को सामुदायिक प्रयास से आगे बढ़ाने का संदेश दिया।</p>
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		<title>महानदी जल बंटवारे को लेकर सीएम साय ने साफ किया रुख, बोले- ओडिशा से नहीं है कोई विवाद</title>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 16:20:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर &#160; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई दशकों से चला आ रहा महानदी जल विवाद अब बहुत जल्द सुलझ जाएगा। उनके अनुसार, इस दिशा में केंद्र सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और दोनों ही पड़ोसी राज्यों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify"><strong>रायपुर</strong><br />
&nbsp;<br />
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई दशकों से चला आ रहा महानदी जल विवाद अब बहुत जल्द सुलझ जाएगा। उनके अनुसार, इस दिशा में केंद्र सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और दोनों ही पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ केंद्र में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के कारण इस संवेदनशील मामले का आपसी सहमति से समाधान निकलना अब आसान हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify">अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, क्षेत्रीय विकास और जन कल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>सांस्कृतिक संबंध गहरे</strong></p>
<p style="text-align:justify">मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच आपसी पारिवारिक और सांस्कृतिक गहरे संबंध हैं। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि दोनों सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा और पूरे क्षेत्र की प्रगति को एक नई गति प्राप्त होगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री साय ने भुवनेश्वर स्थित प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किए और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<p style="text-align:justify"><strong>ट्रिब्यूनल के निर्देश और केंद्र की सकारात्मक पहल</strong></p>
<p style="text-align:justify">गौरतलब है कि महानदी जल बंटवारे को लेकर यह विवाद वर्ष 1983 से चला आ रहा है, जो लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच चर्चा का विषय रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित विशेष ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को आगामी 28 सितंबर 2026 तक अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।<br />
तय समय से पहले सहमति से समाधान</p>
<p style="text-align:justify">जानकारों का मानना है कि इस तय समय सीमा से पहले दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से कोई ठोस समझौता सामने आ सकता है।<br />
कई राज्यों के मुद्दे सुलझे</p>
<p style="text-align:justify">हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की मध्यस्थता और पहल से देश के अन्य राज्यों के बीच कई पुराने जल विवाद सफलतापूर्वक सुलझाए गए हैं, जैसे कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना, ताजेवाला हेडवर्क्स समझौता, सोन नदी जल बंटवारा और केन-बेतवा लिंक परियोजना। इन सफल समझौतों की तर्ज पर अब महानदी विवाद के भी जल्द ही शांतिपूर्ण हल निकलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify">&nbsp;</p>
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