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	<title>admin-1 &#8211; Kakkajee.com</title>
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	<description>CHHATTISGARH&#34;S NUMBER 1 HINDI NEWS PORTAL</description>
	<lastBuildDate>Fri, 07 Aug 2026 06:17:10 +0000</lastBuildDate>
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		<title>“अब निवेशक को फाइल लेकर विभाग ढूंढने की जरूरत नहीं—छत्तीसगढ़ की कोशिश है कि विभाग और मंजूरियां एक क्लिक पर निवेशक तक पहुंचें।”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:45:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[डेली न्यूज़]]></category>
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					<description><![CDATA[“132 स्वीकृतियां, 10 विभाग, डिजिटल सिंगल विंडो और नई औद्योगिक नीति—क्या छत्तीसगढ़ अब निवेश की मंजिल के साथ-साथ कारोबार की आसान शुरुआत का भी नया पता बन रहा है?” अब फाइलों के पीछे नहीं, निवेश के आगे दौड़ेगा सिस्टम!‘Business Made Easy’ के जरिए निवेशक को एक क्लिक पर मंजूरी, जमीन, प्रोत्साहन और जरूरी सेवाएं देने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>“132 स्वीकृतियां, 10 विभाग, डिजिटल सिंगल विंडो और नई औद्योगिक नीति—क्या छत्तीसगढ़ अब निवेश की मंजिल के साथ-साथ कारोबार की आसान शुरुआत का भी नया पता बन रहा है?”</em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब फाइलों के पीछे नहीं, निवेश के आगे दौड़ेगा सिस्टम!</strong><br><strong>‘Business Made Easy</strong>’ के जरिए निवेशक को एक क्लिक पर मंजूरी, जमीन, प्रोत्साहन और जरूरी सेवाएं देने की तैयारी<br>रायपुर।<br>एक निवेशक छत्तीसगढ़ आता है। उसके पास कारोबार का अनुभव है, निवेश की क्षमता है और एक नई औद्योगिक इकाई लगाने का सपना भी। लेकिन उद्योग शुरू करने से पहले उसके सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—<br>“शुरुआत कहां से करूं?”<br>कौन-सा लाइसेंस चाहिए?<br>किस विभाग से अनुमति लेनी होगी?<br>जमीन कहां मिलेगी?<br>कितने आवेदन करने होंगे?<br>किस योजना का लाभ मिलेगा?<br>और आवेदन की स्थिति पता करने के लिए किस कार्यालय जाना होगा?<br>किसी भी निवेशक के लिए यही सवाल कारोबार की पहली परीक्षा होते हैं।<br>छत्तीसगढ़ अब इसी तस्वीर को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।<br>राज्य के निवेश पोर्टल पर ‘Business Made Easy’ को केवल एक नारे के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें निवेशक को मंजूरी और क्लियरेंस से लेकर बिल भुगतान, भूमि आवंटन और अनुपालन तक की सुविधाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।<br><br><strong>एक क्लिक… और बदल सकता है निवेश का पहला कदम</strong><br>छत्तीसगढ़ की नई One Click Single Window System का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी एकीकृत व्यवस्था है।<br>सरकारी पोर्टल के अनुसार यहां 10 विभागों की 132 स्वीकृतियों तक पहुंच उपलब्ध है।<br>यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निवेशक के लिए किसी उद्योग की शुरुआत सिर्फ मशीन लगाने से नहीं होती। उससे पहले कई तरह की अनुमति और औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।<br>अब व्यवस्था का उद्देश्य है कि निवेशक को यह जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिल सके कि उसके प्रोजेक्ट के लिए—<br>कौन-सी मंजूरी चाहिए?<br>किस विभाग से चाहिए?<br>कहां आवेदन करना है?<br>कितना शुल्क देना है?<br>और प्रमाण-पत्र कब डाउनलोड किया जा सकता है?<br>One Click की प्रक्रिया में Know Your Approvals, Registration, Common Application Form, NOC/License, Consolidated Fee Payment और Certificate Download जैसे चरण शामिल हैं।<br><br><strong>यानी अब निवेशक को सिस्टम खोजने की बजाय सिस्टम निवेशक तक पहुंचाने की कोशिश।</strong><br>“कम कागज, कम चक्कर और ज्यादा कारोबार”<br>Business Made Easy का असली उद्देश्य शायद इसी एक वाक्य में समझा जा सकता है।<br>उद्यमी का समय सरकारी कार्यालयों में कम और अपने कारोबार को खड़ा करने में ज्यादा लगे।<br>One Click में आवेदन से लेकर प्रक्रिया और स्वीकृति तक को एकीकृत करने का उद्देश्य इसी दिशा में है।<br>इसके साथ Land Management, Incentives, Production Certificate, Application Tracking और Help Desk जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।<br><br>यह बदलाव खास तौर पर नए उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिन्हें सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी कम होती है।<br>लेकिन कहानी सिर्फ One Click की नहीं है…<br>छत्तीसगढ़ की कारोबारी तस्वीर में दूसरा बड़ा बदलाव औद्योगिक नीति 2024-30 के रूप में दिखाई देता है।<br>यह नीति 1 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक प्रभावी है और राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।<br><br>नीति का उद्देश्य सिर्फ पुराने उद्योगों को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार और विविधीकरण करना भी है।<br>स्टील और खनिज से आगे—अब नई अर्थव्यवस्था पर नजर<br>छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही खनिज, बिजली और स्टील की तस्वीर सामने आती है।<br>लेकिन निवेश की नई तस्वीर इससे कहीं बड़ी है।<br>राज्य के आधिकारिक निवेश पोर्टल ने फार्मा एवं मेडिकल डिवाइस, एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग, IT/ITeS एवं डेटा सेंटर, AI एवं रोबोटिक्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस एवं एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलॉजी, Global Capability Centre, स्टील, पर्यटन तथा ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग को फोकस सेक्टर के रूप में सूचीबद्ध किया है।<br><br><strong>यही है इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा बदलाव।</strong><br>राज्य की औद्योगिक पहचान अब केवल “संसाधन संपन्न छत्तीसगढ़” तक सीमित नहीं रहना चाहती।<br>लक्ष्य है—<br>“संसाधन + तकनीक + निवेश + रोजगार = नया औद्योगिक छत्तीसगढ़”</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निवेश आएगा तो बदलेगी पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था</strong><br>किसी उद्योग की कहानी उसकी फैक्ट्री की चारदीवारी से शुरू होकर वहीं खत्म नहीं होती।<br>एक नया उद्योग शुरू होता है तो उसके साथ—<br>ट्रांसपोर्टर चाहिए,<br>पैकेजिंग चाहिए,<br>वेयरहाउस चाहिए,<br>सर्विस चाहिए,<br>मशीनरी रिपेयर चाहिए,<br>खान-पान चाहिए,<br>सुरक्षा चाहिए,<br>लॉजिस्टिक्स चाहिए।<br>यानी एक बड़ा निवेश अपने आसपास छोटे-छोटे कारोबारों का पूरा नेटवर्क तैयार कर सकता है।<br>यहीं MSME की भूमिका सामने आती है।<br>छत्तीसगढ़ में MSME के लिए बाजार, तकनीक, वित्त और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रम भी निवेश व्यवस्था का हिस्सा हैं। राज्य के RAMP कार्यक्रम में MSME के लिए मार्केट एक्सेस, फाइनेंस, क्षमता निर्माण और संस्थागत मजबूती जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है।<br><strong>Chhattisgarh Business</strong><br>बड़ी फैक्ट्री का फायदा सिर्फ बड़ी कंपनी को नहीं—छोटे कारोबारी को भी मिल सकता है।<br>जमीन से बिजली तक—सिस्टम में भी बदलाव<br>निवेश का सबसे बड़ा सवाल केवल पैसा नहीं, समय भी है।<br>उद्योग लगाने में जमीन, बिजली, पानी, पर्यावरणीय मंजूरी और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं।<br>छत्तीसगढ़ के Ease of Doing Business पोर्टल के अनुसार राज्य ने कई क्षेत्रों में प्रक्रियागत सुधार किए हैं।<br>2024 के सुधार चक्र में 434 में से 417 सुधार लागू किए जाने का उल्लेख सरकारी पोर्टल पर है—यानी 96 प्रतिशत कार्यान्वयन।<br><strong>Chhattisgarh Business</strong><br><strong>इसी पोर्टल के अनुसार—</strong><br>GIS आधारित भूमि आवंटन प्रणाली को एकीकृत किया गया है।<br>भूमि आवंटन के लिए 45 दिन की अधिसूचित समयसीमा का उल्लेख है।<br>औद्योगिक क्षेत्रों में पानी के कनेक्शन के लिए 14 दिन की समयसीमा बताई गई है।<br>बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है।<br>बिजली कनेक्शन जारी करने के लिए 7 दिन की समयसीमा का उल्लेख है, कुछ शर्तों के अधीन।<br>निरीक्षण व्यवस्था में जोखिम आधारित और रैंडम इंस्पेक्शन जैसे प्रावधान हैं।<br><strong>Chhattisgarh Business</strong><br>यानी सुधार का लक्ष्य सिर्फ आवेदन ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में समय और अनिश्चितता कम करना है।<br>निवेशक को प्रोत्साहन भी, उद्योग को सहारा भी<br>नई औद्योगिक नीति के तहत पात्रता और निर्धारित शर्तों के अनुसार निवेशकों के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों का प्रावधान है।<br>सरकारी निवेश पोर्टल पर प्रमुख प्रोत्साहनों में—<br>100% तक स्टाम्प ड्यूटी छूट<br>50% तक कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी<br>50% तक ब्याज सब्सिडी<br>50% तक टेक्नोलॉजी खरीद सब्सिडी<br>50% तक टेक्निकल पेटेंट सब्सिडी<br>20% तक रोजगार सहायता<br>75% तक EPF प्रतिपूर्ति<br>का उल्लेख है। वास्तविक लाभ निवेश की श्रेणी, पात्रता, क्षेत्र और नीति की शर्तों पर निर्भर करेगा।<br><strong>Chhattisgarh Business</strong><br>यानी संदेश साफ है—निवेश सिर्फ आमंत्रित नहीं किया जा रहा, उसे टिकाऊ बनाने के लिए नीतिगत सहारा देने की कोशिश भी है।<br>नए दौर का निवेश—अब AI से GCC तक<br>छत्तीसगढ़ की निवेश कहानी में एक और दिलचस्प अध्याय उभर रहा है।<br>राज्य ने Global Capability Centres (GCC) जैसे नए क्षेत्र को भी निवेश अवसरों में शामिल किया है।<br>सरकारी पोर्टल के अनुसार इसके लिए नवा रायपुर की ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, कुशल मानव संसाधन, IIT-IIM-NIT-IIIT जैसे संस्थानों की मौजूदगी, बिजली की उपलब्धता, आसपास के राज्यों तक बाजार पहुंच और लागत दक्षता को संभावित ताकत के रूप में रेखांकित किया गया है।<br><strong>Chhattisgarh Business</strong><br>इसका अर्थ है कि भविष्य का छत्तीसगढ़ केवल कारखानों का राज्य नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और ज्ञान आधारित उद्योगों का केंद्र बनने की संभावनाएं भी तलाश रहा है।<br>स्टार्टअप से लेकर बड़े उद्योग तक—एक ही तस्वीर के अलग रंग<br>आज का निवेश केवल बड़े उद्योगपति तक सीमित नहीं है।<br>एक युवा के पास आइडिया है तो वह Startup बनाना चाहता है।<br>एक किसान अपने उत्पाद को प्रोसेसिंग यूनिट में बदलना चाहता है।<br>एक MSME अपने कारोबार को बड़ा करना चाहता है।<br>एक कंपनी डेटा सेंटर या GCC स्थापित करना चाहती है।<br>और कोई बड़ा निवेशक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना चाहता है।<br>छत्तीसगढ़ की नई निवेश व्यवस्था इन अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग रास्ते तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।<br>Startup Chhattisgarh की नई व्यवस्था में Fintech, E-Commerce, Edtech, Health-tech, Green Technologies तथा AI/ML, IoT, AR/VR, Big Data और Blockchain जैसी उभरती तकनीकों को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।<br><strong>Chhattisgarh Business<br>अब असली परीक्षा शुरू होती है</strong><br>नीति बन गई।<br>पोर्टल बन गया।<br>सिंगल विंडो आ गई।<br>प्रोत्साहन घोषित हो गए।<br>लेकिन किसी भी निवेश नीति की अंतिम सफलता का पैमाना इससे आगे है।<br>क्या निवेश जमीन पर उतरेगा?<br>क्या प्रस्ताव वास्तविक उद्योगों में बदलेंगे?<br>क्या स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा?<br>क्या MSME को नए बाजार मिलेंगे?<br>क्या निवेशक को वही सरलता जमीन पर भी महसूस होगी जो पोर्टल पर दिखाई देती है?<br>इन सवालों के जवाब आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के औद्योगिक भविष्य की असली तस्वीर बनाएंगे।<br>छत्तीसगढ़ के पास मौका बड़ा है<br>प्राकृतिक संसाधन, कृषि, बिजली, औद्योगिक आधार, कनेक्टिविटी, मानव संसाधन और अब डिजिटल निवेश व्यवस्था—<br>इन सबको अगर एक दिशा मिलती है तो छत्तीसगढ़ की आर्थिक तस्वीर में बड़ा बदलाव संभव है।<br>Business Made Easy का महत्व भी यहीं है।<br>यह सिर्फ “निवेशक को बुलाने” की कोशिश नहीं है।<br>असल लक्ष्य होना चाहिए—<br>निवेशक आए → प्रक्रिया आसान हो → उद्योग लगे → स्थानीय लोग जुड़ें → रोजगार बढ़े → MSME बढ़ें → अर्थव्यवस्था मजबूत हो।<br>अगर यह पूरी श्रृंखला जमीन पर मजबूत होती है तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज और स्टील से नहीं होगी।<br>तब राज्य की नई पहचान हो सकती है—<br>“जहां निवेश करना आसान है और निवेश से आगे बढ़ना भी।”<br><strong>एक नजर में ‘Business Made Easy</strong>’<br>132 — उपलब्ध स्वीकृतियों तक पहुंच<br>10 — संबंधित विभाग<br>417/434 — 2024 सुधार चक्र में लागू सुधार<br>96% — सुधार कार्यान्वयन कवरेज<br>45 दिन — भूमि आवंटन की अधिसूचित समयसीमा<br>7 दिन — बिजली कनेक्शन की उल्लेखित समयसीमा<br>2030 — औद्योगिक विकास नीति की अवधि का अंतिम वर्ष<br>Chhattisgarh Business +2<br>विशेष बॉक्स<br>निवेशक को अब क्या करना है?</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>अपने उद्योग/प्रोजेक्ट का क्षेत्र तय करें।</li>



<li>आधिकारिक पोर्टल पर Know Your Approvals से आवश्यक मंजूरियां देखें।</li>



<li>Investor Registration करें।</li>



<li>Common Application Form के जरिए प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।</li>



<li>उपलब्ध प्रोत्साहनों की पात्रता जांचें।</li>



<li>भूमि और अन्य जरूरी सुविधाओं की जानकारी लें।</li>



<li>आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करें।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>नकटी ग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को लेकर कांग्रेस निम्न स्तरीय राजनीति कर रही है – डॉ. नवीन मार्कण्डेय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 06:42:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
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					<description><![CDATA[छत्तीसगढ़: कांग्रेस हो चुकी है पीडीएफ याने पर्दा डालो फोर्सकांग्रेस को गरीबों की नहीं, अपने करीबियों की चिंता है – डॉ. नवीन मार्कण्डे भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नकटी ग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को लेकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">छत्तीसगढ़: कांग्रेस हो चुकी है पीडीएफ याने पर्दा डालो फोर्सकांग्रेस को गरीबों की नहीं, अपने करीबियों की चिंता है – डॉ. नवीन मार्कण्डे भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नकटी ग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को लेकर कांग्रेस अब निम्न स्तरीय राजनीति कर रही है। कांग्रेस नकटी ग्राम के भोले-भाले लोगों को गुमराह करके बरगला रही है, और उन्हें गलत दिशा में ले जाकर आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि यह सारा कृत्य कांग्रेस का किया-धरा है, लेकिन अब कांग्रेस अपनी उस करतूत को भूल नया पाखण्ड रचने में लगी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने आरोप लगाया कि आज नकटी का जो प्रकरण चल रहा है, उसकी स्क्रिप्ट बहुत पहले सन् 2020 में पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के शासनकाल में लिखी गई थी। उस समय हाउसिंग बोर्ड के जरिए वहां आवासीय कॉलोनी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हाउसिंग बोर्ड द्वारा जमीन मांगे जाने पर। पटवारी, आरआई व तहसीलदार ने चिह्नांकित कर सारी विधिसम्मत प्रक्रिया पूरी कर शासन को सौंपी गई। इसी दरम्यान 2022 में वहां आवासीय कॉलोनी बनने की जानकारी मिलते ही 2022-23 में वहाँ कब्जाधारियों की बाढ़ आ गई। पहले वहां लगभग 3 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा था, जिस पर कच्चे मकान चिन्हांकित हुए। डॉ. मार्कण्डेय ने बताया कि नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को आवास के लिए ढाई डिस्मिल जमीन दी जाती है। लेकिन यहां के कई लोगों ने 10 से 17-20 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा कर लिया है और उन लोगों ने 50 लाख रुपए मूल्य तक के मकान, बाड़ी बना ली है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि नया राजधानी क्षेत्र के तहत नकटी ग्राम तीसरे लेयर का गांव है और इस लिहाज से उसका चरणबद्ध विकास होना है। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने आवासीय विकास के लिए जगह का चिन्हाकित कर प्रक्रिया पूरी की, उस नजरिए से वहां अतिक्रमण बढ़ा और लोगों ने आवश्यकता से अधिक जमीन पर कब्जा किया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा वि अब इस मामले को लेकर कांग्रेस राजनीति कर रही है। गलत दिशा में ले जाकर लोगों को उकसाया जा रहा है। कांग्रेसी नेताओं को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्या अवैध कब्जों को वे प्रश्रय देते हैं या देना चाहते हैं? क्या अवैध कब्जा कांग्रेस के लोग पूरे प्रदेश में कराना चाहते हैं? जब कांग्रेस की सरकार थी तो सभी शासकीय भूमि को बेचने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया था, और उस समय कांग्रेस ने बड़े-बड़े नेता तक ने एकड़ों में रियायती दर खरीदें। गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं अन्य प्रयोजन के लिए जो शासकीय जमीन होती है, उसे भी कब्जा करके कांग्रेस शासनकाल में बेचा गया है। बाद में हाईकोर्ट ने इस आदेश को निरस्त किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी एक करतूत को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने पिछले समय 122 परिवारों को सेरीखेड़ी में बेघर किया। कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र इतना पतित हो गया है कि उस समय गरीबों को सेरीखेड़ी में हटाया गया, उन गरीबों को न एक इंच जगह तक दी गई और न ही एक कोई मकान दिया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि आज घड़ियाली आंसू बहाकर कांग्रेसी प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है कि भाजपा गरीबों के खिलाफ हैं। गरीबों के खिलाफ तो कांग्रेस शुरू से रही है। गरीबी हटाने का नारा देते हुए कांग्रेसी गरीबी नहीं, गरीबों को ही मिटाने का काम करते रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार ने इस समय पिछले एक साल मे लगातार नकटी ग्राम के बाहर शासकीय जमीन पर अवैध कब्जाधारियों को नोटिस देते हुए उनके व्यवस्थापन की भी प्रक्रिया की। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि 29 जून को 61 परिवारों को आवास आबंटित किया और पंजी पर हस्ताक्षर करके ये सब आवास की चाबी लेकर नया रायपुर के सेक्टर-30 में शिफ्ट हुए। इसीलिए शासन-प्रशासन ने कब्जा हटाने की प्रक्रिया की तो उन परिवारों की जरूरत की चीजों तक को नुकसान भी नहीं पहुंचाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि इतनी सब कुछ व्यवस्थित प्रक्रिया कांग्रेस को रास नहीं आई। कांग्रेस प्रदेश में ढाई साल से बैकफुट पर है, किसी प्रकार का मुद्दा नहीं है, जनहित की कोई बात नहीं कर रही है। इसलिए अब झूठे नैरेटिव सेट करके कांग्रेस लोगों को उकसाने के लिए आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार संवेदनशील होकर जन हित में कार्य कर रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि कांग्रेस द्वारा यह झूठा नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि नकटी गांव को तोड़ दिया गया है। श्री श्रीवास ने कहा कि हमारी सरकार ने नकटी गांव को नहीं तोड़ा है। नकटी गांव में कुल 17 वार्ड हैं। उसमें से एक वार्ड, जहां पर कब्जा हुआ था, उनको विस्थापित किया गया है। बार-बार जो यह कहा जा रहा है कि विधायकों के लिए आवास बन रहा है, वह भी सच नहीं है। इन आवासों में अधिकारी-कर्मचारी भी रहेंगे। यह सामूहिक आवास योजना की प्रकिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान पत्रकार वार्ता में रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संदीप यदु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>तूता में अतिक्रमण को लेकर फैली अफवाहों पर NRDA का स्पष्टीकरण, कहा- विस्थापन का कोई प्रस्ताव नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 06:08:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
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					<description><![CDATA[छत्तीसगढ़रायपुर/: ग्राम तूता में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जबकि वास्तविकता यह है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">छत्तीसगढ़<img decoding="async" width="150" height="84" class="wp-image-654159" style="width: 150px;" src="https://www.kakkajee.com/wp-content/uploads/2026/07/2-2.jpg" alt="" srcset="https://www.kakkajee.com/wp-content/uploads/2026/07/2-2.jpg 414w, https://www.kakkajee.com/wp-content/uploads/2026/07/2-2-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" /><br>रायपुर/: ग्राम तूता में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि संबंधित भूमि पर लंबे समय से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं और उन्हीं के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">NRDA के अनुसार ग्राम तूता में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के परीक्षण और विधिवत निरीक्षण के बाद संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। प्राधिकरण का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के प्रावधानों के अनुरूप अपनाई गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 2 जुलाई 2026 को ग्राम के जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख लोगों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की। बैठक में सहमति बनी कि सभी पक्षों के साथ दोबारा बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही स्पष्ट किया गया कि वर्षा ऋतु के दौरान किसी भी प्रकार की विस्थापन कार्रवाई नहीं की जाएगी।<br>NRDA ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति के साथ कई पुराने शिकायत आवेदन भी सार्वजनिक किए हैं। इनमें निजी भूमि तक जाने का रास्ता शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण के कारण बंद होने, हाईकोर्ट के आदेश के पालन की मांग, ग्राम पंचायत द्वारा खेल मैदान सुरक्षित रखने का अनुरोध तथा सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने संबंधी आवेदन शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह विवाद हाल का नहीं, बल्कि कई वर्षों से विभिन्न स्तरों पर उठता रहा है।<br>प्राधिकरण का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित में कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। अब सभी की नजर आगामी बैठक और उसके बाद लिए जाने वाले प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>मध्यप्रदेश में उद्यानिकी तथा प्र-संस्करण विभाग की नर्सरियों को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 04:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल &#160;मध्यप्रदेश में अब उद्यानिकी तथा प्र-संस्करण विभाग की नर्सरियों को पीपीपी मॉडल(PPP model) पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) ने&#160; समत्व भवन में बुलाई समीक्षा बैठक् में इसके निर्देश दिए। यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों व शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित किए जाएं, रोजगारपरक गतिविधियों के लिए खाद्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong></p>
<p>&nbsp;मध्यप्रदेश में अब उद्यानिकी तथा प्र-संस्करण विभाग की नर्सरियों को पीपीपी मॉडल(PPP model) पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) ने&nbsp; समत्व भवन में बुलाई समीक्षा बैठक् में इसके निर्देश दिए। यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों व शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित किए जाएं, रोजगारपरक गतिविधियों के लिए खाद्य प्रसंस्करण पर विशेषज्ञता आधारित सेल गठित हो, चंबल, मालवा और महाकौशल में क्षेत्र विशेष की आवश्यकतानुसार उद्यानिकी विकास की कार्य योजना बनाएं। बागवानी और नर्सरी लगाने को जन आंदोलन बनाना होगा, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श बागवानी विकसित करें।</p>
<p>अधिकारियों को निर्देश दिए कि इंदौर के मालवी आलू व गराडू तथा जबलपुर के मटर व सिंघाड़ा सहित जिले के उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रकिया में तेजी लाए। मुख्यमंत्री(CM Mohan Yadav) ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत और उपज का वाजिब मूल्य मिले, उन्हें यह भरोसा दिलाना आवश्यक है। किसानों की उपज के लिए उपयुक्त सुविधाजनक स्थलों पर स्टोरेज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मंडियों में उपज के मूल्य की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करें। श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किसानों को पुरस्कृत करने की व्यवस्था भी हो। दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं से किसानों के संवाद निरंतर जारी रहे।</p>
<p><strong>उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि नीमच, मंदसौर में औषधीय कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 22 लाख 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं। आगामी 5 वर्ष में 33 लाख 91 हजार हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। रीवा के सुंदरजा आम और रतलाम के रियावन लहुसन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। वहीं खरगोन की लाल मिर्च, जबलपुर के मटर, बुरहानपुर के केले, सिवनी के सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, इंदौर के मालवी आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर के सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जीआइ टैग दिलाने की प्रकिया जारी है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्तावित भ्रमण को दृष्टिगत रखते हुए करें पुख्ता तैयारियां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 04:16:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अशोकनगर के ईसागढ़ स्थित आनंदपुर धाम में 11 अप्रैल 2025 को प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, रूट चार्ट, मंदिरों के दर्शन स्थल, पूजा स्थान तथा सत्संग स्थल का निरीक्षण कर जानकारी ली। साथ ही अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br />
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अशोकनगर के ईसागढ़ स्थित आनंदपुर धाम में 11 अप्रैल 2025 को प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, रूट चार्ट, मंदिरों के दर्शन स्थल, पूजा स्थान तथा सत्संग स्थल का निरीक्षण कर जानकारी ली। साथ ही अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आनंदपुर धाम स्थित श्री परमहंस अद्वैत मत, श्री आनंद शांति कुंज, श्री आनंद शांति भवन, श्री आनंद सरोवर एवं श्री आनंद शांति धाम पहुंचकर दर्शन किये गये।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री आनंदपुर धाम स्थित मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्री आनंद सरोवर के पवित्र जल में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने श्री आनंदपुर धाम की महिमा को गरिमामय बताते हुए कहा कि यहां पहुंचने पर सुखद अनुभूति होती है।</p>
<p><strong>बैसाखी पर लगेगा वार्षिक मेला</strong><br />
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैसाखी पर लगने वाले वार्षिक मेले में आने वाले अनुयायियों एवं दर्शनार्थियों के लिये सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम श्री परमहंस अद्वैत मत का भक्ति परमार्थ का प्रमुख केन्द्र तथा एक महान तीर्थ स्थल एवं अथाह ज्ञान व आत्मिक विद्या का अतुलनीय भंडार है। यहां पर श्री आनंद सरोवर की तरल छटा निराली है तथा परिधि में पूजा स्थलों का अनोखा संगम है। इस पवित्र स्थल पर आकर मन को शांति तथा आत्म ज्ञान को बल मिलता है।</p>
<p>नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला, विधायक चंदेरी श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, विधायक मुंगावली श्री बृजेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक अशोकनगर श्री जजपाल सिंह जज्जी, श्री आलोक तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, ट्रस्ट के महात्मा, अनुयायी एवं पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>रीवा शहर में निवेश करेगा ‘पतंजलि’, 400 एकड़ भूमि आवंटित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 04:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[रीवा &#160;एमपी के रीवा शहर में लंबे समय बाद एक और बड़ा व्यावसायिक ग्रुप निवेश करने जा रहा है। पतंजलि ग्रुप को मऊगंज के घुरेहटा में करीब 400 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां पर पतंजलि ग्रुप ने एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। उसमें खाद्य प्रसंस्करण के साथ ही आयुर्वेद, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रीवा</strong></p>
<p>&nbsp;एमपी के रीवा शहर में लंबे समय बाद एक और बड़ा व्यावसायिक ग्रुप निवेश करने जा रहा है। पतंजलि ग्रुप को मऊगंज के घुरेहटा में करीब 400 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां पर पतंजलि ग्रुप ने एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। उसमें खाद्य प्रसंस्करण के साथ ही आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा उत्पाद, स्किल डेवलपमेंट सेंटर सहित अन्य जरूरी संसाधन विकसित किए जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;बीते साल अक्टूबर महीने में रीवा में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव में पतंजलि ग्रुप के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने एक हजार करोड़ के निवेश की घोषणा की थी।</p>
<p>उस दौरान फूड इंडस्ट्री पर उन्होंने निवेश के संकेत दिए थे, लेकिन हाल ही में भोपाल में एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने कहा है कि मऊगंज के घुरेहटा में मिलने जा रही भूमि पर वह केवल एक प्लांट नहीं बल्कि एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करेंगे। वहां पर कई तरह की गतिविधियां संचालित की जाएंगी।</p>
<p><strong>टीम लेगी जायजा</strong><br />
बनारस-नागपुर रूट पर स्थित घुरेहटा में पतंजलि इंटीग्रेटेड प्रोसेसिंग यूनिट लगाएगी। अप्रेल के आखिरी या मई के पहले सप्ताह में टीम के मऊगंज आने की संभावना है। इधर कार्पोरेशन ने भूमि आवंटन के साथ ही ₹26 करोड़ की डिमांड भी भेजी है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>इंदौर में निरोगी काया अभियान के तहत हुए स्वास्थ्य जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 03:56:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए निरोगी काया अभियान के तहत कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस अभियान में 5 लाख 90 हजार से अधिक इंदौरियों की जांच की गई, जिसमें 62 हजार से अधिक लोग ब्लड प्रेशर और 45 हजार से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए। इसके अलावा, 17,156 लोगों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर</strong></p>
<p>स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए निरोगी काया अभियान के तहत कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस अभियान में 5 लाख 90 हजार से अधिक इंदौरियों की जांच की गई, जिसमें 62 हजार से अधिक लोग ब्लड प्रेशर और 45 हजार से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए। इसके अलावा, 17,156 लोगों को दोनों ही बीमारियां यानी उच्च रक्तचाप और शुगर एक साथ पाई गईं। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि इंदौर में लोग अव्यवस्थित खान-पान और फास्टफूड के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>इंदौर में बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं</strong><br />
इंदौर जैसे खाने-पीने के शौक़ीन शहर में अब स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से बढ़ने लगी हैं। तला-भुना और फास्टफूड खाने के कारण युवाओं में ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। निरोगी काया अभियान के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि 10 प्रतिशत से अधिक लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि इन बीमारियों से प्रभावित कई लोग अब भी इससे अनजान हैं और समय रहते उपचार नहीं करा रहे हैं।</p>
<p><strong>निरोगी काया शिविर और जांच अभियान</strong><br />
स्वास्थ्य विभाग द्वारा केंद्र सरकार की पहल पर चलाए गए इस निरोगी काया अभियान के तहत जिला अस्पताल और संजीवनी क्लिनिकों पर जांच शिविर लगाए गए। इन शिविरों में यह पाया गया कि अनियमित खानपान और इंदौरियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी के कारण युवाओं में नॉन-एल्कोहोलिक फेटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 21 प्रतिशत लोगों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए। 26,727 व्यक्तियों की जांच में लगभग 10 प्रतिशत लोग इस समस्या से पीड़ित थे, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।</p>
<p><strong>अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान</strong><br />
निरोगी काया अभियान में मुंह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के भी मामले सामने आए हैं। अभियान के दौरान 35 हजार लोग ओरल कैंसर और 10,768 लोग सवाईकल कैंसर से पीड़ित पाए गए। इनमें से 1500 से अधिक मरीजों को अन्य गंभीर जांचों के लिए भेजा गया। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इंदौर में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के कारण गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं और समय रहते उनका इलाज न करने से ये बीमारियां खतरनाक रूप ले सकती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशित शिक्षा का प्रबंध</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 03:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[top-news]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों &#039;चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स&#039; (सीडब्ल्यूएसएन) की समावेशित शिक्षा का क्रियान्वयन राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जिला शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से किया जा रहा है। चिन्हांकित बच्चों की प्रविष्टि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर की जा रही है। प्रविष्टि के बाद इन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong><br />
प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों &#039;चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स&#039; (सीडब्ल्यूएसएन) की समावेशित शिक्षा का क्रियान्वयन राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जिला शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से किया जा रहा है। चिन्हांकित बच्चों की प्रविष्टि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर की जा रही है। प्रविष्टि के बाद इन बच्चों को उनकी आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विशेष अभियान के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में एक लाख 43 हजार 439, वर्ष 2023-24 में एक लाख 31 हजार 85 सीडब्ल्यूएसएन बच्चों का चिन्हांकन किया गया। वर्ष 2024-25 में चिन्हित बच्चों की प्रविष्टि का कार्य अंतिम चरण में है।</p>
<p><strong>ब्रेल लिपि की पाठ्य-पुस्तकों का वितरण</strong></p>
<p>प्रदेश में चिन्हित किये गये सीडब्ल्यूएसएन बच्चों को भोपाल की शासकीय ब्रेल प्रेस के माध्यम से ब्रेल लिपि में मुद्रित पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई गई। राज्&zwj;य के 322 विकासखंडों में आईईडी संस्थान तैयार कराये गये हैं। वर्ष 2024-25 में प्रत्येक जिले की एक शाला, जहां सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास के दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं, वहां संसाधन केन्द्र तैयार कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है।</p>
<p><strong>दिव्यांग बच्चों को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण</strong></p>
<p>प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को परिवहन भत्ता और स्टायफंड समेत अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन बच्चों की शिक्षण व्यवस्था से लगे स्त्रोत सलाहकारों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई है। इसके साथ ही दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों, जिला परियोजना समन्वयकों एवं डाइट के प्राचार्यों का उन्मुखीकरण किये जाने के लिये विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किये गये। दिव्यांग बच्चों के चिकित्सीय मूल्यांकन के बाद उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरण की कार्यवाही भी की गई। दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिये खेल-कूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी वर्ष 2024-25 में नवम्बर-दिसम्बर माह में संपन्न कराये गये। सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों में ऐसे बच्चे जिन्हें गृह आधारित शिक्षा की आवश्यकता है, उन्हें 3 हजार 500 रूपये प्रति बच्चे के मान से टीएलएम किट प्रदान की गई।</p>
<p><strong>वर्ष 2025-26 में सीडब्ल्यूएसएन बच्चों की मदद के लिये निर्देश</strong></p>
<p>प्रदेश में नया शैक्षणिक-सत्र एक अप्रैल 2025 से शुरू हो गया है। विशेष आवश्यकता वाले (सीडब्ल्यूएसएन) बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए &#039;स्कूल चलें हम&#039; अभियान में इन बच्चों को चिन्हित करने के निर्देश मैदानी अमले को दिये गये हैं। सर्वेक्षण के बाद इन बच्चों की शिक्षा एवं उनसे जुड़े संसाधनों को पूरा करने के लिये कार्य-योजना तैयार की जायेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>राज्य आनंद संस्थान द्वारा आनंद की ओर प्रशिक्षण का आयोजन 7 से 9 अप्रैल तक</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 03:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल राज्य आनंद संस्थान द्वारा 7 से 9 अप्रैल 2025 तक आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंद की ओर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण में जन अभियान परिषद, शासकीय विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य भी शामिल होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल</strong></p>
<p>राज्य आनंद संस्थान द्वारा 7 से 9 अप्रैल 2025 तक आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंद की ओर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण में जन अभियान परिषद, शासकीय विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य भी शामिल होंगे।</p>
<p>मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रदेश के कुल 50 प्रतिभागी शामिल होंगे, जिन्होंने संस्थान की वेबसाइट पर पंजीयन कराया है। उन्होंने कहा कि धन, पद, ऐश्वर्य आदि के पीछे भागकर इसके माध्यम से आनंदित रहने की संभावना कम ही है। मानव में निरंतर आनंद में रहने के लिए भौतिक सुविधा के साथ संबंध एवं समझ का होना आवश्यक है। इन तीनों के होने पर व्यक्ति स्वयं, परिवार, समाज तथा शेष प्रकृति की व्यवस्था के संगत में आनंदित होकर जी सकता है। &#039;आनंद की ओर&#039; कार्यक्रम में प्रदेश के नागरिकों को इस विषय वस्तु के बारे में जागरूक करने का प्रयास है। संस्थान द्वारा आनंदकों को इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका जीवन आनंदमयी हो और दूसरों को आनंदित रहने की दिशा में भी प्रेरित कर सकें।</p>
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		<title>बाबा बागेश्वर के हिंदू गांव में जाने क्या-क्या होगा, 1000 परिवार रहेंगे, वैदिक संस्कृति पर आधारित होगी जीवनशैली</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin-1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 03:39:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[featured]]></category>
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					<description><![CDATA[छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठ के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 अप्रैल को हिंदू गांव की आधारशिला रखी. इसके साथ ही बागेश्वर धाम के निकट देश के पहले हिंदू गांव के निर्माण की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>छतरपुर</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठ के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 अप्रैल को हिंदू गांव की आधारशिला रखी. इसके साथ ही बागेश्वर धाम के निकट देश के पहले हिंदू गांव के निर्माण की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इस गांव में रहने वालों की जीवनशैली वैदिक संस्कृति पर आधारित होगी. ​देश के पहले हिंदू गांव के स्थापना समारोह में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की संकल्पना हिंदू घरों, हिंदू गांवों, हिंदू जिलों और हिंदू राज्यों की स्थापना के बाद ही पूरी होगी.</p>
<p>योजना के अनुसार इस गांव में 1,000 परिवार रहेंगे और इसे बागेश्वर धाम परिसर में विकसित किया जाएगा. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बागेश्वर धाम जनसेवा समिति हिंदू और सनातन धर्म के अनुयायियों वाले इस गांव के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी और इसे दोबारा बेचा या खरीदा नहीं जा सकेगा. बाबा बागेश्वर ने कहा, &#039;इस भूमि पर भवन बनाए जाएंगे तथा वहां रहने वाले लोगों के लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की जाएंगी. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा. हालांकि, सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत है. हिंदू गांव में घर एग्रीमेंट के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे.&#039;</p>
<p><strong>हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि हिंदू गांव की आधारशिला रखे जाने के पहले ही दिन दो व्यक्तियों ने अपनी सहमति दे दी है तथा भवन अधिग्रहण के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू गांव में लोग जिस मकान में रहेंगे उसकी खरीद-फरोख्त का हक उन्हें नहीं मिलेगा. इसके पीछे की वजह यह है कि विधर्मी लोभ-लालच देकर किसी भी स्तर पर जाकर किसी भी कीमत पर मकान खरीदने के प्रयास करते हैं. अक्सर ऐसा देखने में भी आता है कि लालच में आकर लोग धर्मविरोधी ताकतों के सामने खुद को सरेंडर कर देते हैं. इसलिए बागेश्वर धाम का हिंदू ग्राम क्रय-विक्रय से प्रतिबंधित रहेगा.</p>
<p><strong>जहां सनातन मूल्य नहीं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं</strong></p>
<p>इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू राष्ट्र बनाने से पहले हर घर और हर गांव में हिंदू धर्मावलंबी बनाने का काम शुरू होगा. यह अभियान इसी महीने शुरू होगा. इस अभियान के लिए बागेश्वर धाम से टीमें रवाना हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, &#039;जहां बारिश नहीं होती, वहां फसलें खराब हो जाती हैं. इसी तरह, जहां सनातन मूल्य मौजूद नहीं हैं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं. हम धर्मनिष्ठ हिंदू बनाने के लिए काम करेंगे. प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रधान नियुक्त किया जाएगा.&#039;</p>
<p>धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस वीडियो के माध्यम से देश में नई क्रांति खड़ी होने वाली है. हम उसकी घोषणा सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. उन्होंने कहा, &#039;हम कट्टर हिंदू बनाने का काम करेंगे. सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक प्रभारी होगा, जो एक मंडल प्रभारी से जुड़ा होगा. 10 गांवों का एक मंडल बनाया जाएगा, यह जिला अध्यक्ष से जुड़ा होगा. सभी प्रभारियों को तीन-चार महीने में बागेश्वर धाम आकर बात करनी होगी. मंडल जहां काम कर रहे हैं, वहां कथाएं भी होंगी.&#039;</p>
<p>&nbsp;</p>
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