काबुल
अफगानिस्तान के तालिबान शासन के रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने पाकिस्तान को साफ और सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ किसी भी तरह के हमले या सैन्य कार्रवाई का जवाब 'सोचा-समझा' लेकिन पक्के इरादे और मजबूती के साथ दिया जाएगा। मुजाहिद की यह चेतावनी दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है, जब सीमा पर स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। तालिबानी नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब बहुत हो गया। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए रेड लाइन खींच दी कि इस्लामाबाद अगर अफगानिस्तान की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ कोई सैन्य कदम उठाता है, तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। मुजाहिद ने जोर देकर कहा कि तालिबान किसी भी हमले का जवाब जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर और दृढ़ संकल्प के साथ देगा।
दरअसल, यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब तालिबान अफगानिस्तान में अपनी सत्ता के पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। देश के मौजूदा नेतृत्व ने बार-बार दोहराया है कि अफगानिस्तान अपने इलाके, आजादी और संप्रभुता के खिलाफ किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीमा पार सुरक्षा मुद्दों, मिलिटेंट गतिविधियों और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, जो अब और गहरा होता जा रहा है।
फरवरी 2026 में खुली लड़ाई में बदला तनाव
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में तनाव फरवरी 2026 के आखिरी दिनों में चरम पर पहुंच गया और यह खुली जंग की शक्ल ले चुका है। पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते आतंकी हमलों का हवाला देते हुए पूर्वी अफगानिस्तान के अंदर लक्षित हवाई हमले किए। इन एयरस्ट्राइक्स के जवाब में अफगान तालिबान ने टीटीपी को किसी भी तरह की पनाह देने से साफ इनकार किया और सीमा पर जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। इससे दोनों तरफ बड़े पैमाने पर मिलिट्री मुठभेड़ें शुरू हो गईं और इलाके में बीच-बचाव की कोशिशें भी तेज हो गईं।
दूसरी ओर पाकिस्तान का लगातार आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी आतंकियों को अफगान जमीन पर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराता है, जहां से वे सीमा पार करके पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है। तालिबान का कहना है कि टीटीपी की मौजूदगी और गतिविधियां पाकिस्तान का आंतरिक मामला हैं। साथ ही, काबुल इस्लामाबाद पर अफगानिस्तान की आजादी और संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाता है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल होती जा रही है।
विवादित डूरंड लाइन और चुनौतियां
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2670 किलोमीटर लंबी सीमा ( जो औपनिवेशिक काल की डूरंड लाइन के नाम से जानी जाती है) अभी भी विवादित बनी हुई है। अफगान सरकार इस सीमा को आधिकारिक रूप से मान्यता देने से इनकार करती रही है। इलाके की बदलती परिस्थितियों ने टकराव को और गहरा बना दिया है। टीटीपी के अलावा आईएसआईएस-के (इस्लामिक स्टेट खुरासान) जैसे अन्य सक्रिय आतंकी समूहों की मौजूदगी ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर सिक्योरिटी, मिलिटेंट गतिविधियों और सैन्य अभियानों को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं।
पाकिस्तान के अंदर घरेलू आतंकी घटनाओं में भारी बढ़ोतरी के बाद इस्लामाबाद ने फरवरी 2026 में पूर्वी अफगानिस्तान के अंदर टारगेटेड एयरस्ट्राइक किए। इन हमलों के जवाब में सीमा पर भारी फायरिंग और सैन्य आदान-प्रदान शुरू हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पाकिस्तान की रक्षा नेतृत्व ने इसे 'ओपन वॉर' का दर्जा दे दिया, क्योंकि लड़ाई अब शहरी क्षेत्रों और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जोनों तक पहुंच चुकी थी।
आम नागरिकों पर असर
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि इस संघर्ष के कारण आम नागरिकों की मौतें हो रही हैं, बड़ी संख्या में लोग बेघर हो रहे हैं और सीमा बंद होने से व्यापार तथा जरूरी आपूर्ति रेखाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और चीन सहित कई देशों के कूटनीतिक दखल के बावजूद स्थायी युद्धविराम या कोई टिकाऊ राजनीतिक ढांचा बनाने में अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के रुख में नरमी के कोई ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे।






