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मिग-21 बाइसन की वायुसेना ने दी विदाई, विमान ने भरी आखिरी उड़ान

बाड़मेर
भारतीय वायुसेना के मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान ने आज आखिरी बार आसमान में उड़ान भरी। वायुसेना के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तरलाई एयरफोर्स स्टेशन से मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमानों ने अंतिम बार उड़ान भरी है।
सुखोई- 30MKI के साथ भरी उड़ान

IAF के प्रवक्ता के मुताबिक, मिग-21 बाइसन ने आधुनिक फाइटर जेट सुखोई- 30MKI के साथ उड़ान भरी। इस समारोह के दौरान तीनों सेनाओं के सैनिक मौजूद रहे। प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय वायु सेना अभी भी मिग-21 बाइसन के दो स्क्वाड्रन का संचालन कर रही है।

एलसीए मार्क-1ए से होगा रिप्लेस

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने 3 अक्टूबर को था कि 2025 तक मिग-21 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल बंद हो जाएगा और मिग-21 स्क्वाड्रन को एलसीए मार्क-1ए से बदल दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि एलसीए मार्क-1ए के शामिल होने से मिग-21 की कमी पूरी हो जाएगी।

मिग-21 ने छह दशकों तक की देश सेवा

रक्षा मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि मिग-21 ने लगभग छह दशकों तक देश की सेवा की है। भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान भी मिग-21 ने युद्ध प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वायु सेना के मुताबिक, यह रोक मिग-21 लड़ाकू विमानों के पूरे बेड़े पर लगाई गई है।

भारतीय वायुसेना के मिग-21 का सफर

क्या है मिग-21 का इतिहास

दरअसल, मिकोयान-गुरेविच मिग-21 एक सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है, जिसका निर्माण सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो ने किया है। इसे 'बलालैका' के नाम से भी बुलाया जाता था, क्योंकि यह रुसी संगीत वाद्य ऑलोवेक की तरह दिखता है। इसे भारतीय वायु सेना में 60 के दशक में शामिल किया गया था। हाल ही में मिग-21 जेट ने भारतीय वायु सेना में में 60 साल भी पूरे किए हैं।

 

रूस में बनाया जाता था मिग-21

जब मिग-21 लड़ाकू जेट को भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया, तब इसे रूस में बनाया जाता था। हालांकि, बाद में इसे भारत में बनाया जाने लगा। भारत ने इस विमान को असेम्बल करने का अधिकार और तकनीक भी हासिल कर ली थी। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने मिग-21 लड़ाकू विमान का प्रोडक्शन शुरू किया था, लेकिन रूस ने 1985 के बाद इस लड़ाकू जेट को बनाना बंद कर दिया। हालांकि, भारत इसके अपग्रेडेड वर्जन का इस्तेमाल कर रहा।

'फ्लाइंग कॉफिन' पड़ा मिग-21 लड़ाकू जेट का नाम

  • मिग-21 लड़ाकू जेट ने साल 1955 में अपनी पहली उड़ान भरी थी। इसके बाद साल 1959 में इसे आधिकारिक रूप से सेना में शामिल किया गया था। हालांकि, उस दौर में ये विमान काफी उन्नत किस्म का था।
  • भारत ने उस दौरान कुल 874 मिग-21 जेट को अपने बेड़े में शामिल किया था।
  • बाद में ये लड़ाकू विमान कई बार हादसों का शिकार हुआ, जिस वजह से इसे 'फ्लाइंग कॉफिन' यानी उड़ता हुआ ताबूत के नाम से जाना जाने लगा।
  • 1960 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद से मिग-21 लड़ाकू विमान अब तक 200 से अधिक बार हादसे का शिकार हो चुका है।
  • मिग-21 एक इकलौता ऐसा लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है।

जेट ने युद्ध में पेश किया अपनी कामयाबी का सबूत

बता दें कि मिग-21 अब तक कई बार हादसे का शिकार हो चुका है, लेकिन 1960 के बाद से हुए कई युद्ध में इस लड़ाकू जेट ने भारतीय सेना की जीत में अहम भूमिका निभाई है। चाहे करगिल युद्ध हो या फिर 1971 की जंग हर मोर्चे पर इस विमान ने भारत को जीत का स्वाद चखाया है। 1971 की जंग में मिग-21 लड़ाकू जेट ने भारत के पूर्व और पश्चिम के मोर्चों पर जमकर कहर बरपाया था। इस जंग में मिग-21 ने पाकिस्तानी सेना के 13 फाइटर विमानों को तबाह कर दिया था। वहीं, कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका अदा की थी। मिग-21 और उसके अपग्रेडेट वर्जन ने पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचाया था और भारत की जीत में अहम रोल अदा किया था।

 

मिग-21 जेट की खूब व खामियां

  • बता दें कि भारतीय वायुसेना के पास मिग-21 विमानों के 4 स्क्वाड्रन हैं। एक स्क्वाड्रन में लड़ाकू विमानों की संख्या 16 से 18 के बीच होती है। जानकारी के मुताबिक, वायुसेना के पास 64 मिग-21 उपलब्ध है।
  • बालाकोट स्ट्राइक के वक्त विंग कमांडर अभिनंदन मिग-21 को उड़ा रहे थे और उन्होंने इससे पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 विमान को मार गिराया था।
  • हालांकि, भारतीय वायु सेना इसके सबसे उन्नत किस्म मिग-21 बाइसन का इस्तेमाल करती है।
  • मिग-21 लड़ाकू जेट के इंजन की तकनीक अब काफी पुरानी हो गई है।
  • इस विमान को रूस ने 1985 में ही रिटायर कर दिया था।
  • मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस लड़ाकू विमान के सभी स्क्वाड्रन साल 2025 तक रिटायर कर दिए जाएंगे।

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