चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव में हार के बाद एक बार फिर हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता उलझ पड़े हैं। अब उनकी लड़ाई विधानसभा में नेता विपक्ष पद को लेकर शुरू हाे गई‍ है। वैसे यह पद अधिक से अधिक चार या पांच महीने के लिए ही हाेगा। इसके बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इनेलो में हुई टूट-फूट के बाद अभय सिंह चौटाला का विपक्ष के नेता का पद छिन गया था। अब यह पद कांग्रेस के हिस्‍से में आ सकता है।  

अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र के लिए अभी तक विपक्ष का नेता तय नहीं कर पाई कांग्रेस

इस पद पर कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने गुपचुप ढंग से अपनी दावेदारी जता दी, लेकिन विधानसभा सचिवालय ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें पार्टी के तमाम विधायकों का समर्थन का पत्र देने को कह दिया है। ऐसे में कांग्रेस की आपसी लड़ाई के चलते किरण चौधरी अभी तक कांग्रेस विधायकों का समर्थन पत्र हासिल नहीं पाई हैं। इस कारण विपक्ष के नेता का पद फिलहाल लटक गया लगता है।
हरियाणा में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हैं। इन चुनाव से पहले राज्य सरकार अगस्त माह में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने जा रही है। इस सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को तैयारियां करने के लिए कह दिया गया है। अगस्त में होने वाले सत्र में विपक्ष के नेता का भी होना जरूरी है, लेकिन राज्य में अभी विपक्ष के नेता का पद खाली चल रहा है।

विधायकों के टूटने की वजह से चली गई थी अभय सिंह चौटाला की विपक्ष के नेता की कुर्सी

इनेलो के पास 19 विधायक हुआ करते थे। चार इनेलो विधायकों के जननायक जनता पार्टी को समर्थन देने, चार के भाजपा व कांग्रेस में शामिल हो जाने तथा दो विधायकों के देहावसान की वजह से अभय सिंह चौटाला की विपक्ष के नेता की कुर्सी चली गई। अभय चौटाला इनेलो विधायक दल के नेता हैं।

कांग्रेस विधायकों की संख्या 17 है, जो इनेलो के नौ विधायकों से दोगुनी के करीब है। ऐसे में विधानसभा स्पीकर ने विपक्ष के नेता का पद कांग्रेस को आफर कर रखा है। कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता लोकसभा चुनाव की तैयारियों में उलझे हुए थे कि विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने मौका देखते ही स्पीकर को पत्र लिखकर विपक्ष के नेता पद पर अपनी दावेदारी जता दी है।

कांग्रेस दिग्गजों को जब किरण चौधरी के इस दांव का पता चला तो वे हैरान रह गए। कांग्रेसियों के आपसी विवाद को भांपते हुए विधानसभा सचिवालय ने स्पीकर की ओर से किरण चौधरी को पत्र लिखकर कांग्रेस विधायकों का समर्थन पत्र अथवा प्रदेश अध्यक्ष की चिट्ठी मांग ली है। किरण चौधरी यह पत्र अभी तक स्पीकर को नहीं दे पाई हैं। 

हाईकमान के इशारे के बिना नहीं बनेगी किसी एक नाम पर सहमति  

कांग्रेस के तमाम दिग्गज अब लोकसभा चुनाव से फारिग हो चुके और विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। फिलहाल उनके बीच प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं। हुड्डा गुट प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ विधायक दल के नेता पद पर अपनी दावेदारी जता रहा है, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अभी तक कांग्रेसियों के विवाद को सुलझाने की बजाय उन्हें आपस में लडऩे के लिए छोड़ रखा है।

कांग्रेसियों की इस आपसी लड़ाई के चलते अभी तक विधायक दल की कोई आधिकारिक बैठक भी नहीं हो पाई, जिसमें विपक्ष के नेता पद का नाम तय कर विधानसभा सचिवालय को भेजा जा सके। कांग्रेस हाईकमान से हरी झंडी मिले बिना विधायक भी किसी एक नाम पर सहमत होते नजर नहीं आएंगे। लिहाजा उनके पास अब इंतजार के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है। 

दोहरी दावेदारी से बचने को मांगा किरण चौधरी से विधायकों का समर्थन पत्र 

विपक्ष के नेता का पद जिम्मेदारी का पद होता है। इस पद पर काबिज विधायक को सरकार और विधानसभा सचिवालय की ओर से कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। यदि विधायकों के समर्थन पत्र अथवा प्रदेश अध्यक्ष की चिट्ठी के बिना किरण चौधरी को विपक्ष के नेता पद का दायित्व सौंप दिया गया तो भविष्य में गफलत हो सकती है। यदि कोई दूसरा विधायक अन्य विधायकों या प्रदेश अध्यक्ष की चिट्ठी लेकर आ गया तो हमारे लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। इसलिए किरण चौधरी से विधायकों का समर्थन जुटाने संबंधी पत्र मांगा गया है, लेकिन अभी तक विधानसभा सचिवालय को ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। पत्र में जिस भी विधायक को विपक्ष के नेता पद के लिए कांग्रेस नामित करेगी, उसे यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।